खजूर की खेती कैसे करें 2022 // पूरी जानकारी

 दोस्तो आज फिर से आपका स्वागत है एक नए blog में। आज हम जानेंगे की खजूर की खेती कैसे करें । और इसके क्या लाभ है। इसको खाना चाहिए और ये किस प्रकार हमारे शरीर में लाभ करते है। खजूर में अभी तक ज्यादा किसी को पता नही है। कहा जाता है कि खजूर सबसे पुराना पेड़ है। जो की बहुत ही लाभदायक है। इसके अनेक प्रकार के लाभ है। इससे चटनी अचार कैंडी मुरब्बा आदि तैयार किया जाता हैं।


इसको सुखाकर इससे अनेक प्रकार के प्रोडक्ट तैयार किए जाते है। जो बाजार में आसानी से मिल जाते है। यह खेती गर्म इसको में होती है। जहा तेज गर्मी हो । यह पोधा शुष्क क्षेत्रों में होता है। जैसे भारत मे राजस्थान, गुजरात, त्मिलनाडू, केरल आदि इलाकों में पाया जाता है। इसके पौधे की ऊंचाई 15 से 25 मीटर होती है जिसे अधिक बारिश की जरूरत नही होती है।

चलिए जानते है खजूर की खेती कैसे करें। इसके लिए पूरा आर्टिकल जरूर पढ़े।


उपयुक्त मिट्टी

इसके लिए हमे शुष्क रेतीली मिट्टी की जरूरत होती है। जहां पानी का ठहराव ना हो । पथरीली जमीन मे इसकी खेती नही होती। इसके लिए मिट्टी का PH का जो मान होता है वो 7 से 8 के बीच रहना चाहिए।


जलवायु और तापमान 

यह पोधा एकमात्र ऐसा पौधा होता है जिसको गर्मी की अधिक जरूर होती है। और सभी पौधे को बारिश की जरूरत होती है लेकिन इसको बारिश पसंद ही नही है। यह अधिक गर्मी मे ही खुस रहता है।

यह शुष्क पोधा है जिसके कारण इसको अधिक तापमान को जरूरत होती है। इसको इसको उगने के लिए 30 डिग्री तापमान और फलों को पकने के लिए 45 डिग्री तापमान की जरूरत होती है। इसको सर्दी और बारिश से नुकसान होता है। तभी यह राजस्थान में कामयाब होता है। अधिक गर्मी के कारण।


उन्नत किस्में

खजूर की वैसे तो बहुत सारी किस्में हैं। इसमें एक खास बात यह होती है कि इनमे नर और मादा पोधा होता है। और इन दोनो को एक साथ जरूर लगाना चाहिए। सबसे पहले मादा प्रजाति को जानते हैं।


बरही 

खजूर की सबसे अधिक पैदावार देने वाली किस्म है। इसका पोधा अधिक लंबा होता है। इसके फल बहुत देरी से पकते हैं। लेकिन इनकी पैदावार एक पोधा से 70 से 100 किलो तक होती है।


खुनेजी

यह फल दिखने में पूरी तरह से लाल दिखाई देते है। इनकी पैदावार 70 तक होती है। ये खाने में बेहद मीठे होते है। इनका पोधा जल्दी विकास करता है।


हिल्ल्वी 

यह पोधा जल्दी और अधिक फल देता है। यह खजूर की एगेटी फल देने वाली किस्म है। इसके फल नारंगी रंग के होते है। जिनसे हम एक पौधे से 100 किलो तक फल मिलता है।


जामली

यह फल भी अधिक देरी से तैयार होता है। और लगभग 100 किलो तक यह हमे फल देता है। इनका रंग हल्का पीला होता है। स्वाद में मीठे होते है।


नर प्रजातिया 

इस प्रजाति से हमे फलों की प्राप्ति नही होती। ये सिर्फ हमे फूल ही देते है।


धनामी मेल 

इसके फूल देरी के साथ लगते है। इस किस के पौधों पर 10 से 15 फूल प्राप्त होते हैं। जिनसे 15 से 20 पराग कण मिलतेहैं। जिनका समय 10 दिन तक रहता है।


मदसरी मेल 

इस प्रजाति के पौधे पार 5 फूल मिलते हैं। जिनसे 4 पराग कण मिलते हैं।


खेत की तैयारी

खजूर की खेती के लिए खेत को तैयार करते समय खेत की भुरभुरी मिट्टी को अल्ट पलट दे। दो से तीन बार हेलो से जोत देवे। अच्छी तरीके से जमीन जुटने के बाद। जमीन को समतल बना दे।

अब इसमें एक मीटर व्यास वाले गढ़े खोद दे। और इनमे पुरानी गोबर की खाद और मिट्टी मिलाकर इसको भर देवे। और इसको पानी से सींच दे। यह काम पौधे लगाने से एक महीन पहले किया जाता है।


पौधे लगाने का तरीका और समय

खजूर के पौधे का बीज और पोध दोनो तरीके से इसको लगाया जाता है। बीज लगाने से पौधे को उगने में बहुत अधिक समय लगता है l इसके लिए आप सरकारी नर्सरी से पौधे ले आए जिसके साथ ही सरकार आपको 70 प्रतिस्त का अनुदान भी देगी। और पोध जल्दी उग आती है। पौधे के बीच की लम्बाई 6 से 8 मीटर होनी चाहिए। इसको अगस्त महीने मे लगाने चाहिए। एक एकड़ में 70 पौधे ही लगने चाहिए।


पौधों की सिंचाई

हालाकि ये पौधे पानी के बिना तैयार होते हैं लेकिन फिर भी गर्मी के महीने मे 30 दिन में 2 बार पानी देना होता है। और सर्दी के महीने में एक बार काफी रहता है। जब फल पकने वाले होते है तब नमी रखने के लिए जरूरत के अनुसार पानी देना होता है।


उर्वरक की मात्रा

इसको ज्यादा जरूरत नही होती है। लेकिन इसे पांच साल तक 20 से 25 किलो गोबर की खाद देनी चाहिए ।


खरपतवार

खरपतवार बहुत जरूरी है। साल में इसकी 5 से 6 बार खरपतवार कर देनी चाहिए। और जो पौधों के बीच की जमीन है उसे भी समय समय पर जोत देनी चाहिए।


पौधों में लगने वाले रोग और उनके रोकथाम के उपाय


दीमक

दीमक एक ऐसा कीड़ा है जो कि किसी फसल को नही छोड़ता है। खजूर में वह इसके जड़ में लगती है। जिसके लिए हमे पानी में क्लोरपाईरीफास मिलाकर इसकी जड़ों मे डाल देवे।


कीट पतंगे

अक्सर पौधों की पत्तियों पर कीट जमा हो जाते है जिससे पोधा खराब होना शुरू हो जाता है। इसके लिए आवस्यक कीतनस्क दवाई का छिड़काव करना चाहिए।


पक्षी

जब फल लगने शुरू हो जाते है तो फ्लो को खाने के लिए पक्षी आने शुरू हो जाते है और वो इनको खाकर नष्ट कर देते है। उनके लिए या तो कोई सोरगुल चीज लगाए या फिर अपने पोधा पर जाली लगा दे।


फलों की तुड़ाई

खजूर का पौधा अपने 3 साल के समय के अंतराल के बाद फल देना शुरू करता है। जिसकी गुड़ाई 3 बार में की जाती है। सबसे पहले जब फल पकना सुरू होता है तब और दोबारा जब फल नर्म हो जाते है और आखरी बार जब वो सुख जाते हैं। तब इनकी गुड़ाई की जाती है।


कमाई

यह एक ऐसी फसल है जिसमे हम कम लागत मे अधिक पैदा ले सकते है। यह लगभग 5 साल के बाद एक पोधा 100 किलो तके कि पैदा सुरू हो जाती है। जिसके बाजार मे कीमत 30 से 45 रुपए तक होती है। इससे लगभग किसान 2 लाख तक पैदावार ले सकता है। तो इसी तरह आपको पता चला होगा कि खजूर की खेती कैसे करें।


निष्कर्ष

तो दोस्तो आज आपने खजूर की खेती कि बारे मे जाना की खजूर की खेती कैसे करें। जिसके आपको हर तरह की जानकारी दी गई है। लगाने से फसल पकने तक। आशा करता हूं आपको यह जानकारी अच्छी लगी होगी। और अच्छी ली है तो इसे आगे जरूर भेजे।




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